Tuesday, September 15, 2009

MY FIRST WEB SITE

MY FIRST GHAZAL

3 comments:

  1. रवानी की ज़रूरत है कहो दरिया की लहरों से
    पलट कर जब इधर आएँ तो घुँघरू बाँध कर आएँ

    bahut khoob ....!!

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  2. hamare yahan rajasthani bhasha me ek kahawt hai'gam basyo koni ar mangta aagya!'to bhai bat ye hai ki abhi blog me kuch dala nahin or ham khol baithe.
    aage badho!
    shubhkamnayen !

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  3. आदरणीय गोविंदजी ,
    आपकी ग़ज़लें पढ़ने की तलब में यहां आया था , कुछ निराशा हुई ।
    …जब भी नई पोस्ट लगाएं , प्लीज़ , एक दफ़ा मेल ज़रूर करदें ।
    आपने अपनी मौज़ूदगी द्वारा शस्वरं को आशीर्वाद दिया , मैं धन्य हुआ ।
    मेरी रचनाओं पर भी टिप्पणी / राय देते तो मुझे और श्रेष्ठ सृजन की प्रेरणा मिलती ।
    - राजेन्द्र स्वर्णकार
    शस्वरं

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